द्वार खोलकर अन्तर्मन के भीतर तुम आ जाओ मन रूपी सागर की तुम गहराई में गोते लगाओ। द्वार खोलकर अन्तर्मन के भीतर तुम आ जाओ मन रूपी सागर की तुम गहराई में गोते लगा...
शांति बाहर नहीं पगले! यह तो अंदर की बात है। बाहर तो कोलाहल है, रंजिश है, कोरा विवाद शांति बाहर नहीं पगले! यह तो अंदर की बात है। बाहर तो कोलाहल है, रंजिश है...
दिल के अंतस से उपजी एक कविता..... दिल के अंतस से उपजी एक कविता.....
संग कैसे द्वय को तुष्ट करें संग कैसे द्वय को तुष्ट करें
कभी शक्ति रूप में रक्तबीज कोरोना का संहार करो। कभी शक्ति रूप में रक्तबीज कोरोना का संहार करो।
बचा रह गया था मैं उसके अंदर, और मेरे अन्दर वो बचा रहा क्योंकि उसकी अवाज सुन कर, मन में एक ख... बचा रह गया था मैं उसके अंदर, और मेरे अन्दर वो बचा रहा क्योंकि उसकी अवाज सु...